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सिर मजदूर हिंदी कविता कविता ये अकिंचन तू अब तक कहां था गर्मी बेहाल गरीब और हमदर्दी जेठ मजदूर था साहब मजदूर है प्यार कसम याद ग़ज़ल हालत आग दोपहर अक्स labour

Hindi बेहाल मजदूर Poems